यूपी बोर्ड की परीक्षाएं सिर पर हैं और छात्रों के मन में पास-फेल का डर सताने लगा है। कई बार ऐसा होता है कि कोई होनहार छात्र किसी कठिन विषय (जैसे गणित या भौतिक विज्ञान) में सिर्फ 1 या 2 नंबर से फेल हो रहा होता है। ऐसे छात्रों के लिए यूपी बोर्ड का ‘ग्रेस मार्क्स सिस्टम’ (Grace Marks System) किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। 2026 की परीक्षाओं के लिए भी बोर्ड ने ग्रेस मार्क्स की नीति को बरकरार रखा है।
आज हम आपको बताएंगे कि ग्रेस मार्क्स क्या होते हैं, किसे मिलते हैं, और अधिकतम कितने नंबर मुफ्त में मिल सकते हैं। यह जानकारी आपके आत्मविश्वास को बढ़ाने और डर को कम करने में मदद करेगी।
क्या होते हैं ग्रेस मार्क्स?
ग्रेस मार्क्स वे अतिरिक्त अंक होते हैं जो बोर्ड द्वारा किसी छात्र को पास होने के लिए दिए जाते हैं, यदि वह पासिंग लाइन के बहुत करीब हो। उदाहरण के लिए, अगर किसी विषय में पास होने के लिए 23 नंबर चाहिए और आपके 20, 21 या 22 नंबर आए हैं, तो परीक्षक अपनी तरफ से 1-3 नंबर देकर आपको पास कर देते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक छोटी सी कमी के कारण छात्र का पूरा साल बर्बाद न हो।
कितने नंबर तक ग्रेस मिल सकता है?
यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार, अधिकतम 5 से 8 नंबर तक ग्रेस मार्क्स दिए जा सकते हैं, लेकिन यह अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करता है:
1. एक या दो विषय में: ग्रेस मार्क्स आमतौर पर अधिकतम दो विषयों में दिए जाते हैं। अगर आप सभी विषयों में फेल हैं, तो ग्रेस नहीं मिलेगा।
2. खेलकूद कोटा: जो छात्र राज्य या राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उन्हें खेल कोटे के तहत अलग से ग्रेस मार्क्स देने का प्रावधान है।
3. कठिन प्रश्न पत्र: अगर किसी साल कोई पेपर बहुत ज्यादा कठिन आ जाता है या सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे जाते हैं, तो बोर्ड सभी छात्रों को ‘बोनस मार्क्स’ देने का निर्णय भी ले सकता है।
हालांकि, ध्यान रहे कि ग्रेस मार्क्स पाना आपका ‘अधिकार’ नहीं है, यह पूरी तरह से बोर्ड और परीक्षक के विवेक पर निर्भर करता है।
मार्कशीट पर क्या असर पड़ता है?
ग्रेस मार्क्स से पास होने पर आपकी मार्कशीट में उस विषय के सामने ‘G’ या ‘*’ (Asterisk) का निशान लगा हो सकता है, और नीचे लिखा होता है “Passed with Grace”.
बहुत से छात्र डरते हैं कि इससे उनकी नौकरी या आगे की पढ़ाई में दिक्कत आएगी।
सच यह है: इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। सरकारी नौकरी हो या कॉलेज में एडमिशन, हर जगह केवल आपका ‘PASS’ होना और कुल प्रतिशत (Percentage) देखा जाता है। ग्रेस मार्क्स से पास होना फेल होने से लाख गुना बेहतर है।
किन गलतियों से ग्रेस मार्क्स नहीं मिलते?
अगर आपने कॉपी को खाली छोड़ा है या उसमें गाने/शायरी लिखी हैं, तो आपको ग्रेस क्या, एक भी नंबर नहीं मिलेगा। ग्रेस मार्क्स उसी को मिलते हैं जिसने प्रयास किया हो। अगर आप सवाल का जवाब देने की कोशिश करते हैं, स्टेप्स लिखते हैं, तो एग्जामिनर को नंबर देने का बहाना मिल जाता है। खाली कॉपी पर कोई पेन नहीं चला सकता। इसलिए सलाह दी जाती है कि कुछ न कुछ संबंधित उत्तर जरूर लिखकर आएं।
कंपार्टमेंट परीक्षा का विकल्प
अगर ग्रेस मार्क्स के बाद भी आप पास नहीं हो पाते हैं, तो निराश न हों। बोर्ड ‘कंपार्टमेंट परीक्षा’ (Compartment Exam) आयोजित करता है। इसमें आप फेल हुए विषय की परीक्षा दोबारा दे सकते हैं और अपना साल बचा सकते हैं। यह परीक्षा रिजल्ट आने के 1-2 महीने बाद होती है।
छात्रों के लिए सलाह
ग्रेस मार्क्स के भरोसे न बैठें। इसे केवल एक ‘सुरक्षा कवच’ (Backup) मानकर चलें। अपना लक्ष्य हमेशा 60-70% से ऊपर रखें। जब आप ऊंची छलांग लगाने की कोशिश करेंगे, तभी सुरक्षित स्थान पर गिरेंगे। अपनी तैयारी जारी रखें और पॉजिटिव रहें।
महत्वपूर्ण लिंक्स और जानकारी
| विवरण | आधिकारिक लिंक |
|---|---|
| Exam Rules PDF | https://upmsp.edu.in/Instruction.aspx |
| Result Portal | https://upresults.nic.in |
| UP Board Official Site | https://upmsp.edu.in |

मेरा नाम समरीन है। मैं भी UP Board से पढ़ी हूँ, और मुझे आज भी याद है कि रिजल्ट से पहले वाली रात रोल नंबर ढूंढने में कितना पसीना आता था। इसीलिए मैंने upmsp.info बनाया। मेरा मकसद कोई बिज़नेस करना नहीं, बल्कि आप जैसे छोटे भाई-बहनों की मदद करना है ताकि आपको सही और सीधी जानकारी के लिए भटकना न पड़े।